रेगिस्तान में रफ्तार का नया हब: जोधपुर बनेगा हाई स्पीड ट्रेनों का ट्रेनिंग और मेंटेनेंस सेंटर
वंदे भारत से आगे की तैयारी—इंजीनियरों से लेकर लोको पायलट तक, देशभर की ट्रेनिंग अब राजस्थान में
( संदीप चौधरी स्पेशल स्टोरी )
जोधपुर अब सिर्फ अपनी ऐतिहासिक विरासत और पर्यटन के लिए ही नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की हाई स्पीड रेल प्रणाली के एक बड़े केंद्र के रूप में भी उभरने जा रहा है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के तहत यहां वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के लिए अत्याधुनिक मेंटेनेंस डिपो, बहुद्देश्यीय वर्कशॉप और विश्वस्तरीय ट्रेनिंग सेंटर तैयार किया जा रहा है।
पत्र सूचना कार्यालय (PIB) चंडीगढ़ के पत्रकार प्रतिनिधिमंडल ने राजस्थान दौरे के दौरान इस महत्वाकांक्षी परियोजना का जायजा लिया। यह दौरा केवल निरीक्षण नहीं, बल्कि देश में तेजी से बदलते इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल को समझने का एक मौका भी बना।

जोधपुर क्यों बन रहा है ‘रेल टेक्नोलॉजी हब’?
भगत की कोठी रेलवे स्टेशन के पास बन रहा यह डिपो सिर्फ ट्रेनों की मरम्मत का केंद्र नहीं होगा, बल्कि यह हाई स्पीड रेल टेक्नोलॉजी का ट्रेनिंग हब बनेगा।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा स्वीकृत लगभग 195 करोड़ रुपये की परियोजना के तहत यहां—
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वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों का अनुरक्षण
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हाई-टेक मशीनरी आधारित मेंटेनेंस
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इंजीनियरों और लोको पायलट के लिए एडवांस ट्रेनिंग
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केंद्रीकृत ऑपरेशन सिस्टम
जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

दो चरणों में बन रहा मेगा प्रोजेक्ट
पहले चरण में लगभग 167 करोड़ रुपये की लागत से मेंटेनेंस डिपो का निर्माण तेजी से चल रहा है।
दूसरे चरण में एक आधुनिक रेजिडेंशियल ट्रेनिंग सेंटर बनेगा, जहां देशभर से रेलवे स्टाफ प्रशिक्षण के लिए आएगा।
खास बात यह है कि यहां प्रिफैब्रिकेटेड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हो रहा है, जिससे निर्माण तेज और तापमान नियंत्रण बेहतर रहेगा—जो राजस्थान जैसी गर्म जलवायु के लिए बेहद अहम है।
क्या-क्या होंगी हाईटेक सुविधाएं?
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ओएचई युक्त पिट लाइन
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व्हील मेंटेनेंस सिस्टम
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इंस्पेक्शन के लिए कवर्ड शेड
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बड़ी मल्टी-फंक्शनल वर्कशॉप
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32 केवी पावर सप्लाई सिस्टम
यह सब मिलकर इस डिपो को देश के सबसे आधुनिक रेलवे केंद्रों में शामिल करेंगे।
देशभर को मिलेगा फायदा

यह परियोजना केवल जोधपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे देश पर पड़ेगा—
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हाई स्पीड ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी
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ट्रेनों की सेफ्टी और भरोसेमंदता में सुधार
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इंजीनियरों और स्टाफ को आधुनिक प्रशिक्षण
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रोजगार के नए अवसर
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यात्रियों को तेज और आरामदायक सफर
📍 रणनीतिक बदलाव भी किए गए
इस प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए भगत की कोठी स्थित पुराने इंजीनियरिंग डिपो को बनाड़ स्टेशन शिफ्ट किया गया है, जिससे नए डिपो का विस्तार करीब 780 मीटर तक संभव हुआ है।
🏛️ प्रधानमंत्री से जुड़ा महत्व
इस परियोजना का शिलान्यास 16 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था, जो इस बात को दर्शाता है कि यह सिर्फ एक स्थानीय प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्राथमिकता का हिस्सा है।
🧾 निष्कर्ष
जोधपुर का यह प्रोजेक्ट केवल एक डिपो नहीं, बल्कि भारत के रेलवे भविष्य की नींव है। जिस तरह से देश सेमी हाई स्पीड से हाई स्पीड ट्रेनों की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में जोधपुर का यह केंद्र आने वाले समय में “रेलवे टेक्नोलॉजी कैपिटल” बन सकता है।

